ब्रह्मा कुमारीज़ एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन है जो आत्मा की शुद्धि और विश्व परिवर्तन पर केंद्रित है। यह महिलाओं द्वारा संचालित विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1930 के दशक में हुई।
ब्रह्मा कुमारीज़ का इतिहास
ब्रह्मा कुमारीज़ की नींव 1936-37 में हैदराबाद, सिंध (अब पाकिस्तान) में लेखराज कृपलानी (प्रजापिता ब्रह्मा बाबा) ने रखी। शुरू में ओम मंडली के नाम से जाना गया, यह महिलाओं को नेतृत्व और ब्रह्मचर्य का अधिकार देने के कारण विवादों में घिरा। 1950 में माउंट आबू, राजस्थान स्थानांतरित होकर वैश्विक विस्तार किया, आज 110+ देशों में 8000+ केंद्र हैं।
मुख्य विश्वास और दर्शन
ब्रह्मा कुमारीज़ मानती हैं कि मनुष्य आत्मा है, जो शरीर से अलग है और माथे में स्थित है। परमात्मा सर्वोच्च आत्मा है, जो ज्योति बिंदु स्वरूप है। 5000 वर्षीय चक्र (सतयुग से कलियुग) में वर्तमान संगमयुग है, जहां विश्व परिवर्तन होगा। कर्म सिद्धांत पर जोर, ध्यान से कर्म शुद्धि।
राजयोग ध्यान की विधि
राजयोग ध्यान खुली आंखों से किया जाता है, आत्मा को शांत कर परमात्मा से जोड़ता है। सुबह अमृत vela (4-4:45 AM) में अभ्यास, मुरली (ईश्वरीय ज्ञान) सुनना अनिवार्य। शुभ भावना और शुभकामना से पूर्वाग्रह दूर होते हैं।
जीवनशैली और नियम
- पूर्ण ब्रह्मचर्य (विवाह में भी)।
- सात्विक शाकाहारी भोजन (प्याज-लहसुन त्याज्य), स्वयं या BK द्वारा बनाया।
- शराब, तंबाकू निषेध; सफेद वस्त्र प्राथमिकता।
मुरली अध्ययन और सेवा कार्य दैनिक।
गतिविधियां और उपलब्धियां
माउंट आबू मुख्यालय में ध्यान शिविर, सोलर कुकिंग, योगिक कृषि (फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक)। संयुक्त राष्ट्र से परामर्शी स्थिति, ज वाटुमुल ग्लोबल हॉस्पिटल। पर्यावरण और नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम।
विवाद और आलोचना
शुरुआत में ब्रह्मचर्य और महिलाओं सशक्तिकरण से विरोध, व्यभिचार आरोप लगे। कुछ परिवार तोड़ने, विश्व विनाश भविष्यवाणी की आलोचना। फिर भी, ध्यान और शांति पर फोकस।